January 24, 2020

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MANZILEN- EK BECHAINI SI HAI

एक बेचैनी सी है वो पता नहीं क्या है ।
सब कुछ पास है फिर भी एक खामोशी सी है

एक बेचैनी सी है वो पता नहीं क्या है ।

वह कुछ कह नहीं सकते और हमें कुछ कहना नहीं आता
वह मेरे बिना रह नहीं सकती और मुझे रहना नहीं आता
तलाश है जो खत्म ही नहीं होती
वह प्यास है जो खत्म ही नहीं होती

एक बेचैनी सी है वह पता नहीं क्या है।

मै चाहता हूं कि तेरी हर मुश्किलें मेरी हो और तेरी हर ख्वाहिशें पूरी हो ।
यह ख्वाहिशों का बखेड़ा है ये हसरतें जो उमड़ा है जो तेरा है वो मेरा है ।

एक बेचैनी सी है वो पता नहीं क्या है।

आखिर क्या सच्चाई है जो हम दोनों के दरमियान है
आखिर क्यों रुसवाई है जो हम दोनों के दरमियां है
फिर ये बेचैनी क्या है ये वही है
ये रुसवाई क्या है यह वही है
ये लोग है जो सब इसमें तुम कहां हो
ये लोग हैं जो सब इसमें हम कहां हैं

एक बेचैनी सी है वो पता नहीं क्या है।

हमें मिलने को इतने पल लगे और बिछड़ने को बस एक छन
जैसे ब्रह्मांड में वो अकेला तारा जो अपने आप में ही टूटा है
और लाखों साल बाद बनता है
वो बनता है क्योंकि उसे चाह है किसी की
बेसक करोड़ों साल बाद है ही सही

एक बेचैनी सी है वो पता नहीं क्या है।

MANZILEN- EK BECHAINI SI HAI

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