January 24, 2020

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TU HI TO HO SABKUCH MERA

तू ही रागिणी है तू ही रोहिणी है
तू चाँदनी है तू चकोरणी है !
अम्बर मैं मंडराते बादल
बादल की तू एक पुष्पणी है !!

उठे प्रशुन्न सूमीरण मैं प्रशूनकीत्त एक पंखनी है
तू ही रागिनी है तू ही रोहिणी है तू चाँदनी तू चकोरणी है !
मद मस्त करते ये नैनन देखे जो बदल बरस पड़े तरुवर की छाओं में
बस तू ही एक शशि की यामिनी है !!

तू ही रागिणी है तू ही रोहिणी है
तू चाँदनी है तू चकोरणी है !
कुसुम देख तुझमें अम्बर को भी लज्जा आई घबराई
जब चंद्र देखे तुझे तो मन मैं आयी एक अंगड़ाई !!

तू ही रागिनी है तू ही रोहिणी है तू चाँदनी है तू चकोरणी है
प्रखर पवन देखकर तुझको बोले !
अम्बर में भरने मुझको आये
वसुधा पुनः उतरी अनंत बोली तू सारे सुर की कामिनी है !!

तू ही रागिनी है तू ही रोहिणी है तू चाँदनी है तू चकोरणी है
तलवार लिए तो तू झाँसी है दुष्टो का संघार करे पापियों का उद्धार करे !
पापियों के लिए तू पावक है वरना अच्छों के लिए तू मन्दाकिनी है
तू ही रागिनी है तू ही रोहिणी है तू चंदिनि है तू चकोरणी है !!

TU HI TO HO SABKUCH MERA

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